Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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शांति सुधाकर वैरी करम नशाये रे....
ज्योति जगाये...प्यारी.
तू है परम वीतरागी जिणंदा,
तीन लोकपति है गुणचंदा,
है गुणचंदा यश वरणा न जाये रे...
ज्योति जगाये...प्यारी.
मीत मिला न तुझसा मुझको हितैषी,
तत्त्वप्रकाशक सतउपदेशी,
सतउपदेशी शिव ‘सौभाग्य’ दिपाये रे....
ज्योति जगाये.....प्यारी
श्री गुरुदेवजन्मजयंतीस्तवन
आई आई आई रे, कहानगुरुकी स्वर्ण जयंती
आजे आई रे....
काळुभार नदीसे जल भर मंगल कलशा लाउं,
मोती चौक पुराउं पगलिया रंगोली भरवावुं,
भाया स्वागत साज सजाई रे....कहानगुरुकी०
जन्मधाममें जन्म-जयंती कौ अवसर यों भारी,
पुन्य योगसे योग मिल्यो है, अद्भुत आनंदकारी,
भाया गुंज रही शरनाई रे....कहानगुरुकी०
मंगल गीत वधाई गावा, नाचा दे दे ताली,
हर्ष हर्ष कर करां आरती, भर मोतीयांकी थाली,
भाया श्रीफल भेट चढाई रे....कहानगुरुकी०
२२८ ][ श्री जिनेन्द्र