Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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भक्तिभाव सुं गुरुजयंती अगणित हर्ष मनावा,
आतमज्ञान सुधारस पीकर, निज स्वरूप प्रगटावा,
भाया धन ‘सौभाग्य’ सु गाई रे....कहानगुरुकी०
श्री महावीर जिनस्तवन
त्रिशलाके नंद हो, या जगके चंद हो,
जो भी हो प्रभु आप सकल विश्ववंद्य हो.....
कर्मों के भारी भारों को, पलमें गिरा दिया,
आतमकी सच्ची ज्योतिसे जगको जगा दिया.
मिटती है दुःखदाह, वो शीतल जिनंद हो....त्रिशलाके०
जग
सूर्य महावीर का अनुपम प्रकाश है,
इस ज्ञान से भवि जीवको मुक्ति की आश है,
शरणों में आये जीवको शांति सुकंद हो....त्रिशलाके०
तुमसा है कोई और ना हितकर हुआ प्रभु,
निज पदका ज्ञान-भान शुभ तुमसे हुआ प्रभु,
पाउं ‘सौभाग्य’ मोक्षका, आनंदकंद हो....त्रिशलाके०
उजमबा के नंद हो या मोती के चंद हो,
जो भी हो गुरु आप शासनस्तंभ हो....
सीमंधर-लघुनंद ने विश्व जगा दिया,
कुंदामृत के ज्ञान को जगमें प्रगट किया;
जगती रहे आत्मचाह वो श्री समयसार हो....उजमबाके०
स्तवनमाळा ][ २२९