श्री आदिनाथ जिन – स्तवन
अमरनयरी सम नयरी अयोद्धा,
नाभिनरेन्द्र वसे जिन बुद्धा
सुरपति मेरु शिखर लई धरिया,
कनक – कलश क्षीरोदक भरिया. १
तस पटराणी मरुदेवी माया,
युगपति आदि जिनेश्वर जाया,
सुरपति मेरुशिखर.... २
चैत मास अभिषेक जु करिया,
अष्टोतर शत कुंभ जु धरिया;
सुरपति मेरुशिखर.... ३
भविकन जलधारा संचरिया,
ललित कलोल धरन ऊतरीया,
सुरपति मेरुशिखर.... ४
जय जयकार सुरन ऊचरिया,
इन्द्र ईन्द्राणी सिंहासन धरिया;
सुरपति मेरुशिखर.... ५
अंग अनंग विभूषण धरिया,
कुंडल हार हरित-मणि जडिया,
सुरपति मेरुशिखर.... ६
२३० ][ श्री जिनेन्द्र