चरुवर दीप लेई अपछरिया,
जिनवर आगे उतारी धरिया;
सुरपति मेरुशिखर.... १४
अगर कपूर धूप फल फळिया,
फळ सु – रसाल मधुररस मलिया;
सुरपति मेरुशिखर.... १५
कुसुमांजलि सांजलि समुजळिया,
पंडितराज अमृत वचकलिया,
सुरपति मेरुशिखर.... १६
त्रिभुवन कीर्ति पद – पंकज वरिया,
रत्नभूषण सूरि महाकवि कहिया;
सुरपति मेरुशिखर.... १७
कुंभ – कलश भरी जे जिन धरिया,
शाश्वत शर्म सदा अनुसरिया;
सुरपति मेरुशिखर.... १८
ब्रह्मकृष्ण जिनराज स्तविया,
जय जयकार करी उच्चरिया,
सुरपति मेरुशिखर.... १९
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२३२ ][ श्री जिनेन्द्र