Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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नभतैं सुरपुष्प सु वृष्टि गिरै,
मनु मन्मथ श्रीपति पांय परै;
नभमें सुरदुन्दुभि राजत है,
मधुरी मधुरी ध्वनि बाजत है.
सुरनारि तहां शिर नावत है,
तुमरे गुण उज्ज्वल गावत है;
पदपंकजको चल रूप कियौ,
बहु नाचत राजत भक्त हियौ.
घननं घननं घन घंट बजै,
सननं सननं सुर नारि सजै;
झननं झननं धुनि नूपुरकी,
छननं छननं छनमें फिरकी.
द्रग आनन ओप अनूप महा,
छन एक अनेकन रूप गहा;
बहु भाव दिखावत भक्ति भरे,
कविपै नहिं वर्णन जाय करे.
जिनकी धुनि घोर सुनें जबही,
भविमोर सुधी हरषैं तबही;
धर्मामृत वर्षत मेघझरी,
भावतापतृषा सब दूर करी.
सुरइश सदा शिर नावत हैं,
गुण गावत पार न पावत हैं;
२३६ ][ श्री जिनेन्द्र