Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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मुनिइश तुम्हें नित ध्यावत हैं,
तबही शिवसुंदरि पावत हैं.
प्रभु दीनदयाल दया करिये,
हमरे विधिबंध सबै हरिये;
जगमें मम वास रहै जबलौं,
उरमांही रहौ प्रभुजी तबलौं.
श्री पद्मप्रभ जिनस्तवन
(छंदः तोटक)
जय जय प्रभु पद्म जिनेशवरं,
अलि भव्यनको सुखपूर करं;
वर केवलज्ञान प्रकाश कियो,
भवि जीवनको भ्रम मेटि दियो. १.
भवदाहदवानल मेघझरी,
गज चार कषायन काज हरी;
दुःखभूधरभंजन वज्रकला,
भवसागरतारन पोत भला. २.
समवश्रत की छवि छाय रही,
तिहिंकी महिमा नहि जाय कही;
तिहिं मध्य विराजत गंधकुटी,
बहु रत्न अनोपम मांह जुटी. ३.
स्तवनमाळा ][ २३७