Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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श्री सुपार्श्वनाथ जिनस्तवन
(छंदः लक्ष्मीधरा)
जयति जिनराज गणराज नित ध्यावहीं,
जयति जिनराज सुरराज गुण गावहीं;
रटत ॠषिराज मुनिराज तुम नामको,
कटत सब कर्म भवि लहत शिवधामको.
गर्भसे पूर्व षट् मास मणि वर्षियो,
जन्मके होत तिहूंलोकजन हर्षियो;
अवधि बल जानि हरि आय सेवा करी,
मेरुगिरि शीश जिनन्हवनविधि विस्तरी.
क्षीरसागर तनों नीर निर्मल महा,
सहस अरु आठ भरि कलश हाथै लहा;
शक्र जिनइशके शीश जल ढारियौ,
बजत दुन्दुभि महा शब्द जयकारियौ.
अघघ घघ घघघ घघ घघघ धुनि हो रही,
भभभ भभ भभभ भभ धधध धध शोरही;
शंख पटहादि बाजे बजें घोरही,
किन्नरी गीत गावैं महा शोरही.
न्हवन करि इन्द्र जिनराज गुण गावही,
जन्मकल्याण कर देव दिव जावही;
बहुरि जिनराज कछु काल करि राजको,
त्यागि गृहवास व्रत धारि शिव साजको.
स्तवनमाळा ][ २३९