Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 240 of 253
PDF/HTML Page 252 of 265

 

background image
ध्यान कर खड्ग लै मोह अरि मारियो,
शेष रज विघ्न चउ घाति संहारियो;
समवसरणादि रचा बनी पावनी,
बाह्य आभ्यंतरे सर्व शोभा बनी.
इन्द्र धरनेन्द्र नागेन्द्र तहां आईयो,
पूजि जिनराजको शीश निज नाईयो;
धर्मउपदेश दै भव्य जन तारियौ,
शैल संमेदतैं सिद्धपद धारियौ.
अधम उद्धारकी देव तुम हो सही,
जानि यह टेव तुम चरन सेवक गही;
अरज जिनराज यह आज सुनि लीजिये;
दासको वास प्रभु पास निज दीजिये.
श्री शीतलनाथ जिनस्तवन
(चालमंगलकी)
शीतल पद जुग नमूं उभै कर जोरही,
भिदलापुर अवतरे अच्युतपद छोरही;
दिढरथ तात विख्या सुनंदा मायजी,
चैत कृष्ण वसु गर्भ लिये सुखदायजी.
सुखदाय गर्भकल्याण काजे आय सुरपति सब मिले,
जननी सुसेवा राखि धनपति आप सुरलोकें चले;
षटमास ले नवमास दिनमें वार त्रय मणि वर्षये,
गर्भकल्याण महंत महिमा देखि सब जन हर्षये.
२४० ][ श्री जिनेन्द्र