कितनो न जानै उदधि है, जिम तुहे गुण वरणन करूं,
मैं भक्तिवश वाचाल ह्वै कछु शंक मन नाहीं धरूं,
गुण देहु तेरी करूं विनती अहो सीतलनाथजी,
‘चंद्रराम’ सरनि तिहारि आयो जोरि करिके हाथजी. ७
श्री अनंतनाथ जिन – स्तवन
(छंदः नयमालिनी तथा चंडी तथा तामरस)
जै अनंत गुणवन्त नमस्ते, शुद्ध ध्येय नित संत नमस्ते;
लोकालोकविलोक नमस्ते, चिन्मूरत गुणथोक नमस्ते. १
रत्नत्रयधर धीर नमस्ते, करम – शत्रु – करि – कीर नमस्ते;
चार अनंत महंत नमस्ते, जै जै शिव – तिय – कंत नमस्ते. २
पंचाचार विचार नमस्ते, पंचकर्णमदहार नमस्ते;
पंच पराव्रत चूर नमस्ते, पंचम गति सुखपूर नमस्ते. ३
पंच – लब्धि – धरनेश नमस्ते, पंच भाव सिद्धेश नमस्ते;
छहों दरव – गुण – जान नमस्ते, छहों काल पहिचान नमस्ते. ४
छहों काय – रक्षेश नमस्ते, छह सम्यक् उपदेश नमस्ते;
सप्त-विशन-वन वह्नि नमस्ते, जय केवल अपरह्नि नमस्ते. ५
सप्त तत्त्व गुन भनन नमस्ते, सप्त श्वभ्रगत हनन नमस्ते;
सप्त भंग के इश नमस्ते, सातों नय कथनीश नमस्ते. ६
अष्ट – करम – मल – दल्ल नमस्ते, अष्ट जोग निरशल्ल नमस्ते;
अष्टम धराजिराज नमस्ते, अष्ट गुननि शिरताज नमस्ते. ७
स्तवनमाळा ][ २४३