Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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जै नवकेवल प्राप्त नमस्ते, नव पदार्थथिति आप्त नमस्ते,
दशों धरम धरतार नमस्ते, दशों बंध परिहार नमस्ते.
विघ्नमहीधरविज्जु नमस्ते, जै उरधगति रिज्जु नमस्ते,
तन कनकद्युति पूर नमस्ते, ईक्ष्वाकजगतसूर नमस्ते.
धनु पचास तन उच्च नमस्ते, कृपासिंधु गुण शुच्च नमस्ते,
सेहीअंक निशंक नमस्ते, चितचकोर मृग अंक नमस्ते. १०
रागदोषमद टार नमस्ते, निजविचार दुखहार नमस्ते,
सुर सुरेश-गणवंद नमस्ते, ‘वृंद करो सुखकंद नमस्ते. ११
श्री धार्मनाथ जिनस्तवन
(छंद पद्धरी)
जय धरमनाथ जिन गुणमहान, तुम पदको मैं नित करों ध्यान,
जय गरभ जनम तप ज्ञानजुक्त, वर मोक्ष सुमंगल सर्म-भुक्त.
जय चिदानन्द आनन्दकंद, गुनवृन्द सु ध्यावत मुनि अमन्द,
तुम जीवनि के विनु हेत मित्त तुम ही हो जग में जिन पवित्त.
तुम समवसरण में तत्त्वसार, उपदेश दियो है अति उदार,
ताकों जे भवि निज हेत चित्त, धारैं ते पावैं मोक्ष वित्त.
मैं तुम मुख देखत आज पर्म, पायो निजआतमरूप धर्म,
मोकों अब भौभयतैं निकार, निरभयपद दीजे परमसार.
तुम सम मेरो जगमें न कोय, तुमहीतै सब विधि काज होय,
तुम दयाधुरन्धर धीर वीर, मेटो जगजन की सकल पीर.
२४४ ][ श्री जिनेन्द्र