Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 248 of 253
PDF/HTML Page 260 of 265

 

background image
अति भयो हरषित इन्द्र मनमें देखि जिनवर देवजी,
वसु प्रातिहारज सहित राजैं करत सुरनर सेवजी;
जग तरनतारन सरन मैंने लई तुम पद
कमलकी,
करि कृपा हमपै यह जिनेश्वर सुविधि द्यो निज अमलकी.
(दोहा)
रिद्धि सिद्धि दायक सदा, अरहनाथ महाराज,
तुम पद मेरे उर बसो, सदा सधारो काज.
श्री मुनिसुव्रतनाथ जिनस्तवन
(अडिल छंद)
मुनिसुव्रतस्वामी शिवसुखधामी, निजगुणनामी प्रभु दीजै;
प्रभु तुम गण गाऊं चरन मनाऊं शिवसुख पाऊं जस लीजै.
(छंदः तोटक)
जय केवलज्ञान महानधरं भवसागर नागर पोतवरं;
वसु कर्म अरीगण
नासकरं, भवि जीवनको गुनखासकरं.
भवतापदवानल मेघझरं, अरु काम महाविष मंत्रपरं;
अरिविघ्न गयंदनको हरिहो, सुखसंपतिको क्षणमें भरि हो.
समवसृतमांहि विराजत है, प्रतिहारजकी छबि छाजत है;
त्रय छत्र सु चौसठ चंवर ढरै, नभमें सुर दुन्दुभि घोर करै.
चहुं ओरन तैं सुर आवत हैं, बहु भक्ति भरे गुन गावत हैं;
जिनके पदको सिर नावत हैं, तिनके नित मंगल गावत हैं.
२४८ ][ श्री जिनेन्द्र