Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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गणराज तुमें नित ध्यावत हैं, सुरराज सुपूज रचावत हैं;
उपशांत स्वभाव पशू वरतें, अरिभाव करें न कली परतें.
तुमरे पदपंकजमें वसिकें, अरु इन्द्रिय
मनतनको कसिकें;
विधिकर्म अरीदल में घसिकें, निज राज लियो निजमें वसि है.
तुम दीनदयाल कहावत हो, करुणानिधि नाम लहावत हो;
हमरे उरमांही रहावत हो, फिर क्यों जगमें भरमावत हो.
जगमें तुमही इक मालिक हो, सरनागत के प्रतिपालक हो;
तुमरे पदकी हम आस गही, मम वास करो निज पास सही.
(दोहा)
मुनिसुव्रत महाराजजी, सदा तुमारी आस,
मन वच शीश नवाईकें, नमैं जिनेश्वरदास.
श्री वर्धामान जिनस्तवन
(छंदः त्रिभंगी)
जय जय जगतारी शिव हितकारी,
अनिवारी वसु कर्म हरो;
मम अरज सुनीजै ढील न कीजै,
शिवसुख दीजै दया करो.
(छंदः कुसुमलता)
जयवंतौ जगमांहि जगतपति,
तुम गुण पार न पाया है;
स्तवनमाळा ][ २४९