Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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गणनायक रिषि मुनि सब हारे,
सहस चक्षु ललचाया है.
जिनके गर्भजन्मतप मांही,
सुरसमूह सब आया है;
साधि नियोग योग सब करि कै,
निज निज शीस नवाया है.
बाल समय मदभंजन मदको,
कोटि अनंग लजाया है;
दिव्य सरूप निरखि सुर सुरपति,
शिवतिय मन ललचाया है.
हित मितवचन सुधासम जिनके,
सुनत श्रवण सुख पाया है;
दिव्य सुगंध अंगकी शोभा,
निरखि द्रगन मन भाया है;
भविजनकमल प्रकाशन सूरज,
वज्र स्वरूपी काया है;
वचनकिरण करि भ्रमतम नाशौ,
वृषमारग दरशाया है.
विधिअरिके वश परौ जगत लखि,
मन करुनामें आया है;
मोह अरीके नाश करनको,
वीररूप दरशाया है.
२५० ][ श्री जिनेन्द्र