Shri Jinendra Stavan Manjari-Gujarati (Devanagari transliteration).

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श्री सीमंधर जिनस्तवन
(रागशांतिजिन एक मुज विनंती)
एणी परे में प्रभु विनव्यो, सीमंधर भगवंतो रे;
जाणुं हुं ध्याने प्रगट हुतो, केवल-कमलानो कंतो रे...
ज्यो ज्यो जगगुरु जय धणी.
तुं प्रभु हुं तुज सेवको, ए व्यवहार विवेको रे;
निश्चयनय नहि आंतरो, शुद्धातम गुण एको रे.....
ज्यो०
जिणे आराधन तुज कर्युं, तस साधन कुण लेखे रे;
दूर देशांतर कुण भमे, जे सुरमणि घर देखे रे.....
ज्यो०
अगम अगोचर नय-कथा, पार कुणे नवि लहीए रे...
तेणे तुज शासन एम कह्युं, बहुश्रुत-वयणडे रहीए रे...
ज्यो०
तुं मुज एक हृदये वस्यो, तुंही ज पर उपगारी रे;
भरत-भविक-हित-अवसरे, मुज मत मेलो विसारी रे..
ज्यो०
स्तवन मंजरी ][ १३१