लोकानुप्रेक्षा ]
भावार्थः — चार्वाक (मात्र एक) प्रत्यक्षप्रमाणने माने छे. त्यां, पोताने थतां सुख-दुःखने तथा इन्द्रिओना विषयोने जाणे छे ते प्रत्यक्ष छे. हवे जीव विना प्रत्यक्षप्रमाण कोने होय? माटे जीवनो सद्भाव (अस्तित्व) अवश्य सिद्ध थाय छे.
हवे आत्मानो सद्भाव जेम सिद्ध थाय तेम कहे छेः —
अर्थः — जीव छे ते संकल्पमय छे, अने संकल्प छे ते सुख -दुःखमय छे. ते सुख-दुःखमय संकल्पने जे जाणे छे ते ज जीव छे. जे देह साथे सर्वत्र मळी रह्यो छे तो पण, जाणवावाळो छे ते ज जीव छे.
हवे जीव, देह साथे मळ्यो थको, सर्व कार्योने करे छे ते कहे छेः —
अर्थः — कारण के जीव छे ते देहथी मळ्यो थको ज सर्व कर्म -नोकर्मरूप बधांय कार्योने करे छे; तेथी ते कार्योमां प्रवर्ततो थको जे लोक तेने देह अने जीवनुं एकपणुं भासे छे.
भावार्थः — लोकोने देह अने जीव जुदा तो देखाता नथी पण बंने मळेला ज देखाय छे – संयोगथी कार्योनी प्रवृत्ति देखाय छे तेथी ते बंनेने एक ज माने छे.