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अर्थः — जीव देहथी मळ्यो थको ज नेत्रोथी पदार्थोने देखे छे, देहथी मळ्यो थको ज कानोथी शब्दोने सांभळे छे, देहथी मळ्यो थको ज मुखथी खाय छे, जीभथी स्वाद ले छे तथा देहथी मळ्यो थको ज पगथी गमन करे छे.
भावार्थः — देहमां जीव न होय तो जडरूप एवा मात्र देहने ज देखवुं, स्वाद लेवो, सांभळवुं अने गमन करवुं इत्यादि क्रिया न होय; तेथी जाणवामां आवे छे के देहमां (देहथी) जुदो जीव छे अने ते ज आ क्रियाओ करे छे.
हवे ए प्रमाणे जीवने (देहथी) मळेलो ज मानवावाळा लोको तेना भेदने जाणता नथी एम कहे छेः —
अर्थः — देह अने जीवना एकपणानी मान्यता सहित लोक छे ते आ प्रमाणे माने छे के — हुं राजा छुं, हुं नोकर छुं, हुं शेठ छुं, हुं दरिद्र छुं, हुं दुर्बळ छुं, हुं बळवान छुं. ए प्रमाणे मानता थका देह अने जीव बंनेना तफावतने जाणता नथी.
हवे जीवना कर्तापणादि संबंधी चार गाथाओ कहे छेः —