लोकानुप्रेक्षा ]
अर्थः — आ जीव सर्व कर्म नोकर्मने करतो थको तेने पोतानुं कर्तव्य माने छे माटे ते कर्ता छे, अने ते पोताने संसाररूप करे छे; वळी काळादि लब्धिथी युक्त थतो थको पोताने मोक्षरूप पण पोते ज करे छे.
भावार्थः — कोई जाणे के आ जीवनां सुख-दुःख आदि कार्योने इश्वर आदि अन्य करे छे पण एम नथी. पोते ज कर्ता छे – सर्व कार्यो पोते ज करे छे, संसार पण पोते ज करे छे, तथा काळलब्धि आवतां मोक्ष पण पोते ज करे छे, अने ए बधां कार्यो प्रत्ये द्रव्य-क्षेत्र-काळ -भावरूप सामग्री निमित्त छे ज.
अर्थः — कारण के जीव कर्मनुं फळ आ संसारमां भोगवे छे माटे भोक्ता पण ते ज छे; वळी संसारमां सुख-दुःखरूप अनेक प्रकारना कर्मना विपाकोने पण ते ज भोगवे छे.
अर्थः — आ जीव, अति तीव्र कषाययुक्त थाय त्यारे ते पोते