लोकानुप्रेक्षा ]
परिणाम करे छे. जेम के — मोहपरिणाम, परद्रव्य साथे ममत्वपरिणाम, अज्ञानमय परिणाम तथा ए ज प्रमाणे सुख-दुःख, जीवन-मरण आदि अनेक प्रकारना (परिणाम) करे छे. अहीं ‘उपकार’ शब्दनो अर्थ ‘ज्यारे उपादान कार्य करे त्यारे निमित्तकारणमां कर्तापणानो आरोप करवामां आवे छे.’ एवो अर्थ सर्वत्र समजवो.
अर्थः — जीवो पण जीवोने परस्पर उपकार करे छे अने ते सर्वने प्रत्यक्ष ज छे. सरदार चाकरने, चाकर सरदारने, आचार्य शिष्यने – शिष्य आचार्यने, मातापिता पुत्रने, पुत्र मातापिताने, मित्र मित्रने, स्त्री भरथारने इत्यादि प्रत्यक्ष जोवामां आवे छे. त्यां ए परस्पर उपकारमां पुण्य-पापकर्म नियमथी प्रधान कारण छे.
हवे ‘पुद्गलनी पण मोटी शक्ति छे’ एम कहे छेः —
अर्थः — पुद्गलद्रव्यनी पण कोई एवी अपूर्व शक्ति जोवामां आवे छे के जीवनो केवळज्ञान स्वभाव छे ते पण जे शक्तिथी विणसी जाय छे.
भावार्थः — जीवनी अनंत शक्ति छे तेमां केवलज्ञान शक्ति एवी छे के जेनी व्यक्ति (प्रकाश-प्रगटता) थतां सर्व पदार्थोने ते एक काळमां जाणे