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छे. एवी व्यक्ति (प्रगटता)ने पुद्गल नष्ट करे छे — प्रगट थवा देतुं नथी. ए अपूर्व शक्ति छे. ए प्रमाणे पुद्गलद्रव्यनुं निरूपण कर्युं.
अर्थः — जीव अने पुद्गल ए बंने द्रव्योने जे अनुक्रमे गमन अने स्थितिनां सहकारीकारण छे ते धर्म अने अधर्मद्रव्य छे, अने ते बंनेय लोकाकाशप्रमाण प्रदेशने धारण करे छे.
भावार्थः — जीव-पुद्गलोने गमनमां सहकारीकारण तो धर्मद्रव्य छे तथा स्थितिमां सहकारीकारण अधर्मद्रव्य छे; अने ते बंने लोकाकाशप्रमाण छे.
हवे आकाशद्रव्यनुं स्वरूप कहे छेः —
अर्थः — जे समस्त द्रव्योने अवकाश आपवामां समर्थ छे ते आकाशद्रव्य छे अने ते लोक तथा अलोकना भेदथी बे प्रकारनुं छे.
भावार्थः — जेमां सर्व द्रव्यो रहे एवा अवगाहनगुणने जे धारे छे ते आकाशद्रव्य छे, जेमां (पोतासहित बीजां) पांच द्रव्यो रहे छे ते तो लोकाकाश छे तथा जेमां (आकाश सिवाय बीजां) अन्य द्रव्यो नथी ते अलोकाकाश छे. ए प्रमाणे आकाशद्रव्यना बे भेद छे.