लोकानुप्रेक्षा ]
हवे ‘आकाशमां जेम सर्व द्रव्योने अवगाह आपवानी शक्ति छे तेवी अवगाह आपवानी शक्ति बधांय द्रव्योमां छे’ एम कहे छेः —
अर्थः — बधांय द्रव्योमां परस्पर अवगाह आपवानी शक्ति छे एम निश्चयथी तमे जाणो. जेम भस्म अने जलमां (परस्पर) अवगाहनशक्ति छे तेम जीवना असंख्यातप्रदेशोने पण जाणो.
भावार्थः — जेम पात्रमां जल भरी तेमां भस्म नाखीए तो ते तेमां समाय छे, वळी तेमां साकर नाखीए तो ते पण समाय छे, अने तेमां सोंय चोंपीए तो ते पण तेमां समाय छे, — एम अवगाहनशक्ति समजवी. अहीं कोई प्रश्न करे के — बधांय द्रव्योमां अवगाहनशक्ति छे तो ए (अवगाहशक्ति) आकाशनो असाधारण धर्म केवी रीते ठर्यो? तेनुं समाधान — जोके परपर अवगाह तो बधांय द्रव्यो आपे छे तथापि आकाशद्रव्य सर्वथी मोटुं छे, तेथी तेमां बधांय द्रव्यो समाय छे ए ज तेनी असाधारणता छे.
अर्थः — जो सर्व द्रव्योने स्वभावभूत अवगाहनशक्ति न होय तो एक एक आकाशना प्रदेशमां सर्व द्रव्य केवी रीते वर्ते?
भावार्थः — एक आकाशप्रदेशमां पुद्गलनां अनंत परमाणु द्रव्यो, एक जीवनो प्रदेश, एक धर्मद्रव्यनो प्रदेश, एक अधर्मद्रव्यनो