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अर्थः — सर्व द्रव्य छे ते त्रणे काळमां अनंतानंत छे — अनंत पर्यायो सहित छे; तेथी श्री जिनेन्द्रदेवे सर्व वस्तुने अनेकान्त अर्थात् अनंतधर्मस्वरूप कही छे.
हवे कहे छे के अनेकान्तात्मक वस्तु ज अर्थक्रियाकारी छेः —
अर्थः — जे वस्तु अनेकान्त छे – अनेकधर्मस्वरूप छे ते ज नियमथी कार्य करे छे. लोकमां पण बहुधर्मयुक्त पदार्थ छे ते ज कार्य करवावाळो देखाय छे.
भावार्थः — लोकमां नित्य-अनित्य, एक-अनेक इत्यादि अनेक धर्मयुक्त वस्तु छे ते ज कार्यकारी देखाय छे. जेम माटीनां घट आदि अनेक कार्य बने छे ते जो माटी सर्वथा एकरूप-नित्यरूप वा अनेकरूप -अनित्यरूप ज होय तो तेमां घट आदि कार्य बने नहि. ए ज प्रमाणे सर्व वस्तु जाणवी.
हवे सर्वथा एकान्तरूप वस्तु कार्यकारी नथी एम कहे छेः —
अर्थः — वळी एकान्तस्वरूप द्रव्य छे ते लेशमात्र पण कार्य करतुं नथी तथा जे कार्य ज न करे ते द्रव्य ज केवुं? ते तो शून्यरूप जेवुं छे.
भावार्थः — जे अर्थक्रियारूप होय तेने ज परमार्थरूप वस्तु कही