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करवामां आवे छे अर्थात् द्रव्य धर्मी छे अने पर्याय धर्म छे. वस्तुपणे ए बंने अभेद ज छे. कोई नैयायिकादिक धर्म-धर्मीमां सर्वथा भेद माने छे; तेमनो मत प्रमाणबाधित छे.
हवे द्रव्य अने पर्यायमां सर्वथा भेद माने छे तेमना मतमां दूषण दर्शावे छेः —
अर्थः — द्रव्य अने पर्यायमां (सर्वथा) भेद माने छे तेने कहे छे के – हे मूढ! जो तुं द्रव्य अने पर्यायमां वस्तुपणाथी पण भेद माने छे तो द्रव्य अने पर्याय बंनेनी निरपेक्ष सिद्धि नियमथी प्राप्त थाय छे.
भावार्थः — (एम मानतां) द्रव्य अने पर्याय जुदी जुदी वस्तु ठरे छे पण तेमां धर्म-धर्मीपणुं ठरतुं नथी.
हवे जेओ विज्ञानने ज अद्वैत कहे छे अने बाह्य पदार्थ मानता नथी. तेमना मतमां दूषण दर्शावे छेः —
अर्थः — जो बधीय वस्तु एक ज्ञान ज छे अने ते ज नानारूपथी स्थित छे – रहे छे तो एम मानतां ज्ञेय कांई पण न ठर्युं, अने ज्ञेय विना ज्ञान ज केवी रीते ठरशे?
भावार्थः — विज्ञानाद्वैतवादी – बौद्धमती कहे छे के — ‘ज्ञानमात्र ज