लोकानुप्रेक्षा ]
नथी.’ एम ते केवी रीते कहे छे? अथवा ‘कहेवावाळो पण नथी,’ तो शून्य छे एम शी रीते जाणे छे?
भावार्थः — पोते प्रगट विद्यमान छे अने कहे छे के ‘कांई पण नथी’ पण एम कहेवुं ए मोटुं अज्ञान छे; तथा शून्यतत्त्व कहेवुं ए तो मात्र प्रलाप (फोगट बकवाद) ज छे, कारण के कहेवावाळो ज नथी तो आ कहे छे कोण? तेथी नास्तित्ववादी मात्र प्रलापी (मिथ्या बकवादी) छे.
अर्थः — घणुं कहेवाथी शुं? जेटलां नाम छे तेटला ज नियमथी पदार्थो परमार्थरूपे छे.
भावार्थः — जेटलां नाम छे तेटला सत्यार्थरूप पदार्थो छे. घणुं कहेवाथी बस थाओ! ए प्रमाणे पदार्थोनुं स्वरूप कह्युं.
हवे, ए पदार्थोने जाणवावाळुं ज्ञान छे तेनुं स्वरूप कहे छेः —
अर्थः — जे नाना धर्मो सहित आत्माने तथा परद्रव्योने पोतानी योग्यतानुसार जाणे छे तेने सिद्धान्तमां निश्चयथी ज्ञान कहे छे.
भावार्थः — पोताना आवरणना क्षयोपशम के क्षय अनुसार जाणवायोग्य पदार्थ जे पोते तथा पर, तेने जे जाणे छे ते ज्ञान छे. ए सामान्यज्ञाननुं स्वरूप कह्युं.