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अर्थः — तिर्यंचमांथी नीकळी मनुष्यगति पामवी अति दुर्लभ छे. जेम चार पंथ वच्चे रत्न पडी गयुं होय तो ते महाभाग्य होय तो ज हाथमां आवे छे तेम (मानवपणुं) दुर्लभ छे. वळी आवो दुर्लभ मनुष्यदेह पामीने पण जीव मिथ्याद्रष्टि बनी पाप उपजावे छे.
भावार्थः — मनुष्य पण कदाचित् थाय तो त्यां म्लेच्छखंड आदिमां वा मिथ्याद्रष्टिओनी संगतिमां ऊपजी पाप ज उपजावे छे.
हवे कहे छे के – मनुष्य पण थाय अने ते आर्यखंडमां पण ऊपजे तोपण त्यां उत्तम कुळादि पामवां अति दुर्लभ छेः —
अर्थः — मनुष्यपर्याय पामी कदाचित् आर्यखंडमां पण जन्म पामे तो त्यां उच्च कुळ पामवुं दुर्लभ छे. कदाचित् उच्च कुळमां पण जन्म पामे तो त्यां धनहीन दरिद्री थाय अने तेनाथी कांई सुकृत्य नहि बनतां पापमां ज लीन रहे छे.
अर्थः — वळी जो धनवानपणुं पण पामे तो त्यां इन्द्रियोनी परिपूर्णता पामवी अति दुर्लभ छे. कदाचित् इन्द्रियोनी संपूर्णता पण पामे तो त्यां रोगसहित देह पामे, पण नीरोग होवुं दुर्लभ छे.